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Thursday, November 15, 2018

Jesus came into the world

यीशु प्रार्थना के द्वारा ही इस संसार में आया
देखें प्रेरितों 7:37-38}

यीशु प्रार्थना के द्वारा ही उसे क्रूस पे मरने की सामर्थ मिली
देखें मत्ती 26:44-46}

और यीशु प्रार्थना करने के द्वारा ही वह मुर्दों से जी भी उठा
देखें इब्रानियों 5:7}

हमने बहुत बार यीशु के विषय में सुना कि वह अच्छा है चंगा करता है वह हमसे बहुत प्रेम करता है
लोगों ने अधिकतर उसके काम पर ध्यान दिया

पर क्या हमने कभी उसके जीवन पर ध्यान दिया?

उसके अनेक शत्रु थे

पहला उसका सताने वाला शैतान और दुष्ट आत्माएं जो परीक्षाएं परिस्थितियां और प्रलोभन के द्वारा बारंबार उसे गिराने की कोशिश की लेकिन वह कभी गिरा नहीं उसके जन्म के समय से ही उसे नाश करने के खोज में रहते
देखें मत्ती 2:13 मरकुस 1:13)

(2)दूसरे


शास्त्री फरीसी हेरोदियों और
व्यवस्थापक

जिन्होंने उस पर झूठे आरोप पे आरोप लगाए यह शैतान है पेटू पियक्कड़ है पापी है
क्योंकि वह पापियों के साथ रहता था
लोगों को भरमाने वाला झूठा भविष्यवक्ता है क्योंकि यह सब्त के विधि को तोड़ता है

क्योंकि इन ज्ञानी शास्त्री फरीसीयो ने
केवल नियमों को जाना लेकिन परमेश्वर के ह्रदय को नहीं

यह लोग {हमेशा} इस खोज में रहते
कि यीशु को कैसे फसाए इसीलिए वह हमेशा उसे जांचने के लिए की यह ठीक बोल रहा है या गलत

सवालों पर सवाल पूछते
लेकिन यीशु के पास सवालों से पहले उत्तर रहता और जब प्रभु यीशु सवाल पूछता तो किसी की हिम्मत नहीं होती जवाब देने की
देखें मत्ती 22:15-46}

(3)तीसरे

उसके अपने लोग उसके भाई उस पर विश्वास नहीं करते
उसके बाद उसके परिवार के लोग उसे पकड़ने के लिए यह कहते हुए ढूंढते हैं कि उसका दिमाग ठिकाने पे नहीं है
देखें मरकुस 3:21 यूहन्ना 7:5)
लेकिन उसके जी उठने के बाद
उसके भाइयों ने विश्वास किया और नए नियम में हम दो पुस्तकों को पाते हैं
एक याकूब दूसरा यहूदा की जो उसके भाइयों ने लिखी}}

उसके चेले भी एक से बढ़कर एक नमूने थे

क्रोध से भरे याकूब यूहन्ना
स्वार्थी पतरस अविश्वाससी थोमा
विश्वासघाती यहूदा

जब भी प्रभु अपने चेलों को कुछ महत्वपूर्ण बातें सिखाता उनका ध्यान
हम में से बड़ा कौन है हम रोटी को नहीं लाएं व्यर्थ बातों में लगा रहता)

नीचे लिखें वचनों को बहुत ध्यान से पढ़ें


मरकुस 3:9-11
और उस ने अपने चेलों से कहा, भीड़ के कारण एक छोटी नाव मेरे लिये तैयार रहे ताकि वे मुझे दबा न सकें।
क्योंकि उस ने बहुतों को चंगा किया था; इसलिये जितने लोग रोग से ग्रसित थे, उसे छूने के लिये उस पर गिरे पड़ते थे।
और अशुद्ध आत्माएं भी, जब उसे देखती थीं, तो उसके आगे गिर पड़ती थीं,

अब कुछ देर के लिए कल्पना करें

आप कहीं जा रहे हैं और अचानक कोई आकर आपके शरीर पे गिर पड़े तो कैसा लगेगा आपको?

या आप जा रहे हैं और दुष्ट आत्मा ग्रस्त
कोई व्यक्ति अचानक आपके सामने आके चिल्लाने लगे तो?

या आपको बहुत भूख लगी हो और आप जैसे ही खाना को खाने वाले हो ते से ही इधर-उधर से बहुत सी भीड़ आके आपको देखने लगे तो? या आप आराम करने के लिए कहीं पर गए और आपने देखा वहां पर भी भीड़ पहुंच गई

आराम से थोड़ा सोचें यदि हम रहते तो क्या करते??

क्योंकि लोग उस पर झपट पढ़ते हैं चंगे होने के लिए
और दुष्ट आत्मा ग्रस्त लोग भी उसके सामने अचानक आकर चिल्लाने लगते हैं इतनी भीड़ में वह कहीं दब ना जाए इसीलिए उसे नाव में चढ़ना पड़ता

मरकुस 3:20
[20]और वह घर में आया: और ऐसी भीड़ इकट्ठी हो गई, कि वे रोटी भी न खा सके।

बाइबल बताती है कई बार वे खाना भी नहीं खा पाते आराम तक नहीं कर पाते भीड़ कारण

अब इधर शैतान और दुष्ट आत्माएं उसे परेशान करने वाले फिर शास्त्री फरीसी
फिर उसके परिवार वाले फिर उसके एक से बढ़कर एक नमूने उसके चेले


और फिर इतनी सारी भीड़

अंदर उसके खुद के लोग उसे सताते
बाहर लोग उसे मार डालने के लिए ढूंढते

अब बाहर परेशानी अंदर भी परेशानी इधर परेशानी उधर परेशानी चारों तरफ परेशानी के बाद भी

उसने एक विजय और सामर्थ्य जीवन को जिया एक ऐसा जीवन जो अब तक लोगों को अत्यंत प्रभावित करता है

उसका रहस्य क्या था?

और वह था {व्यक्तिगत प्रार्थना का जीवन}

यीशु ने अपनी देह में रहने के दिनों में ऊंचे शब्द से पुकार पुकार कर, और आंसू बहा बहा कर उस से जो उस को मृत्यु से बचा सकता था, प्रार्थनाएं और बिनती की और भक्ति के कारण उस की सुनी गई।इब्रानियों 5:7}

वह घंटों अकेले जाकर प्रार्थना करता कभी कभी पूरी रात प्रार्थना में बिताता

जब वह बपतिस्मा ले रहा था तब उसने प्रार्थना की लूका 3:21}

जब वह पहाड़ पर था तब उसने प्रार्थना की लूका 8:29}

जब वह क्रूस पे था मृत्यु के समय
तब भी उसने प्रार्थना की लूका 23:34)

उसका जीवन प्रार्थना का जीवन था

यीशु ने प्रार्थना की और वह प्रार्थना के सामर्थ को बहुत अच्छे से जानता था इसीलिए उसने बारंबार प्रार्थना करने के लिए कहा

मत्ती 26:41
जागते रहो, और प्रार्थना करते रहो, कि तुम परीक्षा में न पड़ो: आत्मा तो तैयार है, परन्तु शरीर दुर्बल है।

उसका चेला पतरस वह यीशु से प्यार करता वह डिंग नहीं मार रहा था या दिखाने के लिए नहीं कह रहा था

कि मैं तेरे साथ मरने के लिए भी तैयार हूं
वह सचमुच उसके पीछे चलना चाहता था
इसीलिए यीशु जब पकड़ाया गया तब पतरस उसके पीछे-पीछे तक गया

लेकिन जब समस्या आई तब उसके सामने गिर पड़ा

पतरस क्यों गिरा प्रार्थना ना करने के कारण

लोग आज प्रभु से दूर क्यों हो रहे हैं
प्रार्थना ना करने के कारण

बहुत से लोग प्रभु की इच्छा पर चलना चाहते हैं
लेकिन जब पाप या ऐसी परिस्थितियां उनके सामने आती है वह गिर पड़ते हैं
क्योंकि उनके पास सामर्थ नहीं है

फिलिप्पियों 4:13
जो मुझे सामर्थ देता है उस में मैं सब कुछ कर सकता हूं।


और सामर्थ आता है पवित्र आत्मा से
और पवित्र आत्मा से हम भरते हैं प्रार्थना के जीवन से

यदि हम सच में पापों के ऊपर विजय जीवन को जीना चाहते हैं तो व्यक्तिगत  प्रार्थना का जीवन अनिवार्य है

व्यक्तिगत प्रार्थना का जीवन हमें हर बातों पर जय पाने के लिए सामर्थ देता है
यदि हमारा व्यक्तिगत प्रार्थना का जीवन नहीं है तो हम पापों पर विजय होकर नहीं जी सकते

{और प्रार्थना एक संबंध है जहां पे हम परमेश्वर को {सच्चाई} से खोजते हैं}

लेकिन हमें खोजना क्या है

हमें उसके मार्गदर्शक उसके प्रेम को
उसकी इच्छा को { आशा और सच्चाई} के साथ प्रार्थना और वचन के माध्यम से खोजना हैं बिल्कुल आराम से)

जैसा कि हमने पिछले बार सीखा
की प्रार्थना कैसे करनी चाहिए और प्रार्थना करना कितना आसान है
और कैसे हम परमेश्वर के साथ एक संबंध को बनाते हैं और हमें परमेश्वर में क्या खोजना है प्रार्थना के समय हमारे मन भटकने पर हमें क्या करना चाहिए

और प्रार्थना ना कर पाने के बहुत से कारणों को भी हमने देखा यदि आपने उसे अब तक नहीं पढ़ा तो फेसबुक में true Bibel study
मेरे प्रोफाइल में जाकर उसे पढ़ सकते हैं
जिन का टाइटल है (1) प्रार्थना करते समय कपटी ना हो (2) प्रार्थना एक संबंध है}

अब कुछ लोग सोचते हैं यीशु तो परमेश्वर थे तो उन्होंने फिर क्यों प्रार्थना की

हां यीशु एक तरफ पूरा परमेश्वर थे
देखो यूहन्ना 1:1 लूका 8:38-39)

लेकिन दूसरी ओर पूरा मनुष्य भी थे
एक ऐसा मनुष्य जिसने कभी भी पाप नहीं किया क्योंकि वह पाप से नहीं लेकिन पूरी पवित्रता और परमेश्वर के सामर्थ्य से जन्मे
देखें 1 तीमुथियुस 2:5 प्रेरितों. 2:22)

यीशु को भी भूख लगती मत्ती 11:19)
यीशु भी सोता मत्ती 8:24)
यीशु भी थक जाते थे यूहन्ना 4:6)

परमेश्वर होते हुए भी उसने एक मनुष्य के समान जीवन जिया सब अधिकार सब कुछ होते हुए भी उसने कभी भी अपने फायदे के लिए इनका इस्तेमाल नहीं किया
अवश्य देखें फिलिप्पियों 2:6-7}

क्योंकि परमेश्वर का वचन इस बात को पूरी रीती से स्पष्ट करता है


इब्रानियों 4:15
क्योंकि हमारा ऐसा महायाजक नहीं, जो हमारी निर्बलताओं में हमारे साथ दुखी न हो सके; वरन वह {{सब बातों}} में हमारी नाईं परखा तो गया, तौभी निष्पाप निकला।)

उसे कुछ भी विशेष नहीं दिया गया)

उसे भी प्रार्थना करनी पड़ी की पवित्र आत्मा से भर के आज्ञा माने लोगों को चंगा करें और प्रचार करें

तो फिर उसने ऐसा क्यों किया

इसका उत्तर है कि वह हमसे अत्यंत प्रेम करता है इसलिए

हम कभी भी कैंसर या कानो के दर्द को नहीं जान सकते जब तक से हम खुद  उनका अनुभव ना किए हो

(इसीलिए परमेश्वर होते हुए भी उसने मनुष्य के सारे दर्द और दुखों का अनुभव किया क्योंकि वह हमसे अत्यंत प्रेम करता है इसेलिए

इब्रानियों 4:15
क्योंकि हमारा ऐसा महायाजक नहीं, जो हमारी निर्बलताओं में हमारे साथ दुखी न हो सके;)

कोई हमें ना समझे लेकिन
वह हमारे हर एक दुख और तकलीफ को बहुत अच्छे से जानता है क्योंकि वह खुद उन बातों से होकर गया है और उसे मालूम है कि इनसे कैसे विजय होना है
इसीलिए हमेशा उसके पास जाएं
क्योंकि उसके पास हर एक बातों का जवाब है

और दूसरा कारण है कि हमें आदर्श और मार्गदर्शन मिले

कि कैसे हमें जीवन जीना है और प्रार्थना कितना महत्वपूर्ण है
देखें 1 पतरस 2:21)

इसीलिए प्रार्थना करो कि तुम परीक्षा में ना पड़ो आत्मा को तैयार है लेकिन शरीर दुर्बल है}

आगे हम चर्चा करेंगे एकता की प्रार्थना में अभिषेक बहता है

हमें अपनी प्रार्थना में याद रखें

सच कहूं तो यीशु के जैसा कोई नहीं
महिमा केवल प्रभु को

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